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क़ानून में यौन उत्पीड़न की परिभाषा क्या है?

Written by स्वत्वाधिकारी,बैस्ट रिपोर्टर न्यूज,जयपुर on . Posted in न्याय,कानून व्यवस्था,अपराध ,एन्टीकरेप्शन समाचार

क़ानून में यौन उत्पीड़न की परिभाषा क्या है?

यौन उत्पीड़न की रोकथाम के लिए दो क़ानून हैं. दोनों ही साल 2013 में लाए गए.पहले क़ानून के तहत 'किसी के मना करने के बावजूद उसे छूना, छूने की कोशिश करना, यौन संबंध बनाने की मांग करना, सेक्सुअल भाषा वाली टिप्पणी करना, पोर्नोग्राफ़ी दिखाना या कहे-अनकहे तरीके से बिना सहमति के सेक्सुअल बर्ताव करना', यौन उत्पीड़न माना जाएगा.इसके लिए तीन साल की जेल की सज़ा और जुर्माने का दंड हो सकता है. दूसरा क़ानून, 'सेक्सुअल हैरेसमेंट ऑफ़ वुमेन ऐट वर्कप्लेस (प्रिवेन्शन, प्रोहिबिशन एंड रिड्रेसल)', ख़ास तौर पर काम की जगह पर लागू होता है.इसमें यौन उत्पीड़न की परिभाषा तो वही है पर उसकी जगह और संदर्भ काम से जुड़ा होना चाहिए.यहां काम की जगह सिर्फ़ दफ़्तर ही नहीं बल्कि दफ़्तर के काम से कहीं जाना, रास्ते का सफ़र, मीटिंग की जगह या घर पर साथ काम करना, ये सब शामिल है. क़ानून सरकारी, निजी और असंगठित सभी क्षेत्रों पर लागू है.दूसरा फ़र्क ये है कि ये औरतों को अपने काम की जगह पर बने रहते हुए कुछ सज़ा दिलाने का उपाय देता है.यानी ये जेल और पुलिस के कड़े रास्ते से अलग न्याय के ल

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क्या आपने सिम कार्ड को सुरक्षित किया है?

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क्या आपने सिम कार्ड को सुरक्षित किया है?

सिम कार्ड पर आपके बारे में कीमती जानकारी रहती है.

अगर आपने अपने स्मार्टफोन के डेटा को एन्क्रिप्ट किया है या अपने स्मार्टफोन को पिन से लॉक किया है तो भी कोई आपका सिम कार्ड निकालकर आपके बारे में ढेर सारी जानकारी हासिल कर सकता है.

अगर आप अपने एंड्रॉयड फ़ोन की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं तो आप अपने स्मार्टफोन के सिम को लॉक करने की सोच सकते हैं.

सिम कार्ड एक डिफ़ॉल्ट पिन के साथ ही आता है और पिन अनलॉक की या पीयूके होता है. अगर आप गलती से सिम कार्ड को लॉक कर देते हैं या गलत पासवर्ड डाल देते हैं तो पीयूके उसे अनलॉक करने में मदद करता है.

सिम को लॉक करना बहुत मुश्किल नहीं है. जिस स्मार्टफोन में आपने सिम डाल रखा है उसके सेटिंग्स में जाइए और उसके बाद 'मोर टैब' पर क्लिक कीजिए.

उसके बाद सिक्योरिटी चुनना होगा और उसके बाद समय है 'सेट अप सिम कार्ड लॉक' चुनने का.

फिर 'लॉक सिम कार्ड' के साथ वाले बॉक्स को टिक कर दीजिए और अपना पिन डाल दीजिए. उसके बाद ओके दबाइए.

जब भी सिम लॉक होगा, तो आप कोई भी कॉल बिना पिन डाले नहीं कर पाएँगे.

अगर आप सिम के पिन को बद

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आर के मार्बल्स समूह से 250 करोड़ नकदी बरामद, राजस्थान पत्रिका सहित कई मुख्य प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ने खबर दबाई

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राजस्थान खान विभाग घूस काण्ड के बाद से ही आर के मार्बल्स और सहयोगी कंपनी वंडर सीमेंट जांच के घेरे में ,इसी क्रम में आयकर विभाग ने समूह के सियासी रसूख को देखते हुए केंद्रीय रिज़र्व पुलिस के 80 हथियार बंद जवानों के साथ गुप्त तरीके से एक साथ  4 राज्यॉ के  29 ठिकानों पर छापे मारे ,7000 करोड़ की सम्पति दस्तावेज और 250 करोड़ नकद बरामद की।

 

सबसे ज्यादा छापे की कार्यवाही राजस्थान के 7 शहरों में हुई , दिलचस्प बात ये की प्रदेश का सबसे बड़ा मीडिया समूह होने का दावा करने वाला अखबार राजस्थान पत्रिका इस खबर को छिपा गया, ,हर साल मिलने वाले करोडो का विज्ञापन पत्रकारिता पर भारी पड़ गई , इसी तरह इन्द्राणी -शीना के मुद्दे पर 15 दिन लगातार पूरे देश को झिलाने वाला इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से भी ये खबर गायब है , 

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दैनिक भास्कर के लोग व्यापारियों को धमकाते हैं, विज्ञापन के लिए

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राजस्थान स्थित कोटा जिले के गुमानपुरा के एक व्यापारी को विज्ञापन के लिए दैनिक भास्कर का मार्केटिंग प्रतिनिधि धमका रहा है. वो खुद बोल रहा है कि दैनिक भास्कर और राजस्थान पत्रिका दोनों डाकू हैं. इसने विज्ञापन ना देने पर उल्टी खबर छापने की धमकी दी. इससे पता चलता है कि मीडिया वाले पैसे मिलने पर चुप रहते हैं और पैसे न दिए तो उल्टी खबर दिखाने लगते हैं. इसका एक सटीक उदहारण कुछ दिन पहले भी देखा जा चुका है. कोटा के मेयर महेश के नालंदा में चल रहे अवैध काम का कवरेज करने गए पत्रकारों को मेयर के लोगों ने बंदी बना लिया. इसकी FIR भी दर्ज़ है लेकिन अख़बार में यह खबर नहीं छपी क्योंकि विज्ञापन के माध्यम से पैसा फेककर मीडिया का मुँह बंद कर दिया गया था. अब आप बताओ इसे बिकाऊ मीडिया नहीं बोलोगे तो और क्या बोलोगे.

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इंटरनेट की जिंदगी का काला धब्बा है साइबर अपराध

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इंटरनेट की जिंदगी का काला धब्बा है साइबर अपराध

इंटरनेट ने अगर हमारी जिंदगी आसान की है तो दूसरी तरफ कई मुश्किलें भी पैदा की है। चंद सेकेंडों का क्लिक हमें हजार सूचनाएं को आसानी से मुहैया कराता है। लेकिन साइबर अपराध इंटरनेट की दुनिया पर काला धब्बा बनकर मंडरा रहे है। जबसे इंटरनेट का जन्म हुआ तब से यह मुश्किल नासूर का शक्ल अख्तियार कर चुका है। साइबर अपराधों से लगभग पूरी दुनिया परेशान है और इसके बचाव के तरीके भी खोजे जा रहे हैं । लेकिन इन अपराधों पर अंकुश लगने की बजाए यह तेजी से बढ़ते चले जा रहे है।

देश में वर्ष 2011 में कुल 13,301, वर्ष 2012 में 22,060, वर्ष 2013 में 71,780 साइबर अपराध दर्ज किए गए।  साल 2014 में साइबर क्राइम की करीब डेढ़ लाख वारदातें होने की बात अध्ययन में सामने आई है । जिसके 2015 में बढक़र लगभग दोगुना हो जाने का अनुमान जताया गया है। यह बात भी सामने आई कि इन्हें अंजाम देने वाले अधिकतर अभियुक्त युवा हैं। जिनकी आयु 18 से 30 साल के बीच है। साइबर क्राइम ब्रांच के मुताबिक पिछले कुछ वर्षो मे इन अपराधों में जमकर बढ़ोतरी हुई है और निशाने पर अक्सर टीन एजर्स रहते हैं।

वर्तमान मे