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स्कूल क्रमोन्नति हेतु ग्रामवासी व बेटियाँ कर रही हैं भूख हडताल,सरकार की उदासीनता ने बना दिया 'बेटी पढ़ाओ'मिशन को सिर्फ जुमला

Written by कार्यालय,बैस्ट रिपोर्टर न्यूज,जयपुर। समाचार डेस्क प्रभारी—1 on . Posted in शिक्षा समाचार

बैस्ट रिपोर्टर न्यूज,मसूदा,अजमेर। राजस्थान सरकार के शिक्षा विभाग की उदासीनता के चलते मोदी सरकार का 'बेटी बचाओ,बेटी पढाओ' मिशन उन बालिकाओं के लिए सिर्फ एक जुमला साबित हो रहा है जो पिछले करीब दो साल से अपने उच्च प्राथमिक विद्यालय को माध्यमिक के रूप में क्रमोंन्नत करवाने हेतु संघर्ष कर रही हैं। हम बात कर रहे हैं अजमेर जिले के मसूदा विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत अन्धेरी देवरी के भरकाला ग्राम स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय की। 1962 में प्राथमिक विद्यालय के रूप में स्थापित एवं 1999 में मिडिल में क्रमोन्नत इस विद्यालय में सत्र 2017—18 के अनुसार 299 नामांकन हैं जिनमें से 155 लडकियाँ हैं। प्रतिवर्ष 30—35 बच्चे 8वीं से 9वीं कक्षा हेतु क्रमोन्नत होते हैं परन्तु यह क्रमोन्नति बच्चों के लिए खासकर बालिकाओं के लिए आगे कि पढ़ाई हेतु फुल स्टॉप साबित होता है। कारण यह है कि सीनीयर सैकण्डरी स्कूल गांव से करीब 8 किलोमीटर दूर स्थित है जिसका रास्ता दुर्गम एवं गहरी खाईयों से युक्त बिलकुल सुनसान है,रास्ते पर आवागमन के साधनों का भी अभाव रहता है अत:ग्रामवासी बालिकाओं को खतरे में डालने की बजाय उनकी पढ़ाई छुडवाना बेहतर समझते हैं। बालिकाओं और ग्रामवासीयों की मांग है कि यदि उनके गांव की मिडिल स्कूल को ही सैकण्डरी स्कूल के रूप में क्रमोन्नत कर दिया जाए तो उनकी बेटियाँ आगे की पढ़ाई छोड़ने को मजबूर होने से बच सकती हैं। देखने वाली बात ये है कि छोटी—छोटी बालिकाएँ आगे पढ़ना चाहती हैं परन्तु सरकार है कि उनकी मिडिल स्कूल को सैकण्डरी तक क्रमोन्नत करने को तैयार ही नहीं है वो भी तब जबकि उनका स्कूल क्रमोन्नति के सभी घोषित मापदण्ड़ों को पूरा करता है। बात चाहे जमीन की हो,चाहे नामांकन की या चाहे भामाशाहों के दान की,स्कूल को क्रमोन्नत कराने हेतु बालिकाओं और ग्रामवासियों ने ऐडी—चोटी का जोर लगा रखा है। ग्रामवासियों ने अपनी बालिकाओं के लिए अपने स्तर 2 बीघा जमीन तथा पांच लाख रूपये नकद की व्यवस्था भी कर ली है। बालिकाओं व ग्राम वासियों ने अपनी बेटियों के लिए क्या नहीं किया? एसडीएम,डीईओ,जिला कलेक्टर,शिक्षा मंत्री यहाँ तक कि मुख्यमंत्री स्तर तक ज्ञापन दिया दिया,एसडीएम कार्यालय पर धरना दिया,रैलियाँ निकाली परन्तु नतीजा ढ़ाक के तीन पात। अब एक बार फिर से बालिकाएं व ग्रामवासी अपने गांव में 19 जून से अनिश्चितकालीन क्रमिक भूख हडताल पर बैठें हैं उनका राज्य सरकार से सिर्फ एक ही प्रश्न है आखिर राज्य सरकार बालिकाओं की वाज़िब मांग से कन्नी क्यों काट रही है,जबकि शिक्षा मंत्री वासुदेव देवनानी अपने कार्यकाल में हजारों स्कूलों की क्रमोन्नति का दावा करते हैं तथा मसूदा के भाजपा विधायक सुशील कंवर पलाड़ा ने इस संबंध में राज्य सरकार से मांग कर चुके हैं। भूख हडताल पर बैठे ग्रामवासियों व बालिकाओं का कहना है कि जब तक सरकार उनकी मांग पर सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं देती है उनका अनशन जारी रहेगा तथा बालिकाएं स्कूल में कदम तक नहीं रखेंगीं। ग्राम वासियों की निराशा एवं आक्रोश वाजिब है क्योंकि वे पिछले दो साल से लगातार इस मांग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं परन्तु राज्य सरकार मापदण्डों के पूर्ण होने,स्वयं की ही पार्टी के स्थानीय विधायक होने तथा स्वयं शिक्षा मंत्री के इसी जिले के होने के बावजूद आखिर इस स्कूल को क्रमोन्नत क्यों नहीं कर रही है,यह समझ से परे हैं। राज्य सरकार का यह रूख 'बेटी बचाओ,बेटी पढ़ाओ' मिशन के बिलकुल विपरीत है अत: शिक्षा मंत्री एवं राज्य सरकार दोनों को चाहिए को बालिका शिक्षा से जुड़े इस गम्भीर मुद्दे पर अविलम्ब ध्यान दें तथा विद्यालय को सैकण्डरी तक क्रमोन्नत कर ग्रामवासियों के अनशन को अविलम्ब समाप्त कराने हेतु सभी आवश्यक कदम उठाये।