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15 दिन से रोड़वेज बंद,पक्ष विपक्ष दोनों बेपरवाह,स्थापना दिवस तक का नहीं किया लिहाज

Written by स्वत्वाधिकारी,बैस्ट रिपोर्टर न्यूज,जयपुर on . Posted in अवर्गीकृत समाचार

बैस्ट रिपोर्टर न्यूज,जयपुर (अनिल यादव)। करीब 4700 बसों के विशाल बेड़े से सुसज्जित तथा प्रतिदिन करीब 10 लाख नागरिकों को उनके गन्तव्य तक पहुँचाने वाली राजस्थान रोड़वेज के पहिए पिछले 15 दिनों से बंद हैं,हड़ताली कर्मचारी एवं लाखों यात्री दोनों परेशान हैं परन्तु पक्ष व विपक्ष दोनों को जैसे सांप सूंघ गया है। 1 अक्टूबर को राजस्थान रोड़वेज का स्थापना दिवस था,हडताली कर्मचारी तक इसे अपने ढंग से मना रहे थे परन्तु राजस्थान सरकार ने अपनी ही सरकार के इतने महत्वपूर्ण अंग के स्थापना दिवस तक का लिहाज नहीं किया। रोड़वेज की हडताल से प्रतिदिन करोड़ों का घाटा हो रहा है, जनता निजी बस संचालकों के हाथों लुट रही है और सत्ता पक्ष है कि गौरव यात्रा निकालने में व्यस्त है,शायद इसलिए क्योंकि ये निजी बसें किसी गैर की नहीं वरन् सरकार में खास दखल रखने वाले कुछ खास नेताओं की हैं जोकि पंजाब की तर्ज पर रोड़वेज को बंद करके राजस्थान में भी एक 'परिवहन माफिया' को स्थापित करने में पूरी शिद्दत से जुटे हुए हैं। माना रोड़वेज घाटे में है परन्तु घाटे में क्यूं है यह प्रश्न शायद सत्ता पक्ष के लिए अधिक मायना नहीं रखता है क्योंकि सुना है रोड़वेज को विगत चार वर्षों में ही करीब 2500 करोड़ का घाटा हो गया है जोकि इससे पहले के 17 वर्षों में हुए कुल घाटे 2100 करोड़ से भी 400 करोड़ रूपये अधिक है। परिवार में यदि कोई बीमार हो जाता है तो उसे लावारिस नहीं छोड़ा जाता और न ही उसकी हत्या की जाती है वरन् उसकी बीमारी का हर संभव इलाज किया जाता है,इतनी सी बात शायद सरकार के कर्ताधर्ताओं को समझ नहीं आ रही है या शायद वो इस बात को समझना ही नहीं चाहते हैं क्योंकि सुप्रीम कोर्ट द्वारा बजरी बंद के बाद जैसे बजरी माफिया प्रशासन की नाक के नीचे चांदी काट रहा है ठीक उसी प्रकार रोड़वेज बंद होने के बाद से निजी परिवहन माफिया भी जनता को बेखौफ होकर,बिना किसी रोकटोक के लूटने में जुटा हुआ है। ऐसा भी नहीं हैं कि राजस्थान रोड़वेज प्रारम्भ से ही घाटे में रही है या देश में मौजूद करीब 54 सरकारी रोड़वेज निगमों में से सारे के सारे ही घाटे में चल रहे हैं परन्तु सरकार रोड़वेज को घाटे में होने का भ्रम फैलाकर रोड़वेज को बंद कराने पर तुली है। सरकार की इस निष्ठुरता के कारण रोड़वेज के हड़ताली कर्मचारियों में इस कदर निराशा फैल रही है कि रोड़वेज के एक सेवानिवृत्त कर्मचारी ने बकाया भुगतान की चिंता में हाल ही में आत्महत्या तक कर ली है। रोड़वेज हडताल के मुद्दे पर विपक्ष यानी आने वाले वक्त सत्ता के सपने देख रहीं और शायद सत्ता सुनिश्चित मान रही कांग्रेस जैसी पार्टी की चुप्पी भी हैरान करने वाली है। निराशा के बावजूद आशा की बात ये है कि राजस्थान उच्च न्यायालय ने सरकार को रोड़वेज को घाटे से उबारने के लिए एक ठोस नीति बनाने तथा 11 अक्टूबर को इससे संबंधित शपथपत्र प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। हड़ताली कर्मचारीयों को सरकार के सकारात्मक रूख की प्रतीक्षा है, सरकार की अनदेखी से क्षुब्द हडताली कर्मचारी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की राजस्थान यात्रा के दौरान विरोध प्रदर्शन करने के विकल्प पर भी विचार कर रहे हैं। सरकार को चाहिए कि वो रोडवेज जैसे अति महत्वपूर्ण सरकारी प्रतिष्ठान को गर्त में जाने से बचाये तथा रोड़वेज कर्मचारियों की हड़ताल को तुड़वाने हेतु अविलम्ब सकारात्मक वार्ता प्रारम्भ करें ताकि न सिर्फ रोड़वेज के हड़ताली कर्मचारियों को वरन् रोड़वेज में प्रतिदिन सफर करने वाले प्रदेश के करीब 10 लाख यात्रियों को भी राहत मिल सके।