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मौजूदा समय में अनियंत्रित सेवाओं के एक छत्र संघटित नियमन की आवश्यकता

Written by कार्यालय,बैस्ट रिपोर्टर न्यूज,जयपुर। समाचार डेस्क प्रभारी—2-पी.सी.योगी on . Posted in प्रेस कॉन्फ्रेंस/प्रेस नोट समाचार

बैस्ट रिपोर्टर न्यूज,जयपुर (आशा पटेल)। आज के समाचार पत्रों में राज्य सरकार द्वारा आगामी विधानसभा सत्र में निजी शिक्षण संस्थाओं के नियामक बोर्ड बिल से सम्बन्धित समाचार छपा है जो कि सरकार द्वारा एक स्वागत योग्य कदम है तथा जिसका लम्बे समय से इंतजार था। लेकिन खबर में प्रस्तावित बिल में चेयरपर्सन की उम्र सीमा हटाने सम्बन्धित बात गले नहीं उतरती जो कि किसी भी नियामक संस्था में नहीं है। हालांकि बिल प्रारूप बनाने वाली समिति के अध्यक्ष द्वारा इसे एक मानवीय भूल बताया गया हैं।

वस्तुस्थिति इस समाचार तक सीमित नहीं है बल्कि मुद्दा उन सभी निजी सेवा क्षेत्रों का है जो न केवल सरकार के नियंत्रण के बाहर है बल्कि उपभोक्ताओं के शोषण के लिए उतना ही जिम्मेदार है जितना कि निजी शिक्षण संस्थाएं। उदाहरण के तौर पर निजी परिवहन सेवाएं मनोरंजन पार्क खाने-पीने के रेस्टोरेंट चैपाटी आदि आदि। अगर सरकार द्वारा इन सभी निजी अनियंत्रित सेवाओं को एक छत के नीचे लाकर मौजूदा नियामक एजेन्सी जैसे आरईआरसी या अन्य किसी के अधीन लाकर अलग अलग सेवा बेंच के अन्तर्गत नियंत्रित करें तो उससे न केवल सरकार का समय व पैसा बचेगा बल्कि आरईआरसी जैसी ऐजेन्सी के उपलब्ध संसाधनों का भी समुचित उपयोग हो सकेगा। इस तरह से इस एजेन्सी के कार्य को एक बहुद्देशीय जिम्मेदारी का एहसास होगा। भले ही ये विभिन्न‘सेवा बेंच अलग अलग कानूनों द्वारा निर्धारित की गयी हो या इस व्यवस्था के लिए कोई एकीकृत बिल पेश किया जाए। सरकार द्वारा अपने एकीकृत बिल में उपरोक्त सेवाओं के लिए स्टार रेटिंग प्रणाली भी लागू कर सकती है जो कि उपभोक्ताओं को आकर्षित करने में सहायक होगी।

बिल के तीसरे नियम के अनुसार जो कुछ भी गलत हो सकता है वह गलत होगा। कुल मिलाकर सरकार द्वारा कोई भी कार्य किसी उद्देष्य की पूर्ति के लिए होना चाहिए न कि मात्र खानापूर्ति के लिए।