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भारतीय का भारतीय से,इंसान का इंसान से निवेदन

Written by अनिल यादव,सम्पादक,बैस्ट रिपोर्टर न्यूज,जयपुर on . Posted in विशेष संपादकीय आलेख

दोस्तों चुप रहने की लाख कोशिशों के बावजूद मेरी आत्मा में बसी इंसानियत व भारतीयता चुप नहीं हो पा रही है । आज एक इंसान व सच्चे भारतीय की आत्मा असहनीय दर्द,पीड़ा व अनिश्चितता के भंवर में फंसी हुई है। अखण्डता की शपथ लेने वाले लोग देश को खंड—खंड करने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं। स्थिति बेहद भयानक है ,हमारी नासमझी व स्वार्थी तत्वों की शातिर चालों से भारत भीतर से धीरे—धीरे खंडित हो रहा है,लगातार बंट रहा है। कोई भी स्वयं को पहले एक इंसान या एक सच्चा व सभ्य भारतीय नहीं मानना चाहता। उसके लिए देश सिर्फ दूसरों को दिखाने के लिए व उपदेश देने तक मायना रखता है। धर्म,जाति,भाषा, क्षेत्र,पार्टी, खानपान,वेशभूषा,अगड़ा,पिछड़ा,यहाँ तक कि व्यवसाय के नाम पर भी पूरा देश हिंसक हो रहा है ,एक दूसरे की लाशों पर चलकर विकास का रास्ता ढूंढ रहा है। क्या आपको लगता है कि लाशों की सीढ़ी बनाकर हम में से कोई भी विकास कर सकता है ? मुझे तो नहीं लगता। दोस्तों सच्चाई तो यह है कि रोटी की भूख हमें हिंसक बना रही है और रोटी की यह भूख हमारे लड़ने या छीना झपटी करने से स्थाई तौर पर नहीं मिटने वाली है। इस भूख को मिटाने के लिए हमने जिन लोगों को जिम्मेदारी दी थी,आज वो ही हमें आपस में लड़ाकर हमसे अपनी भूख को भुलाने की कोशिश कर रहे हैं उन्हें डर है कि कहीं हम उनसे 'रोटी' ना मांग बैठें। दोस्तों भारत विश्व के समन्दर में तैरता एक असीम संभावनाओं वाला जहाज है,कुछ लोग जानबूझकर इसे डूबता हुआ देख रहे हैं और कुछ नासमझी में इसे डुबोने में लगे हैं। अगर किसी भी कारण से हमारा ये जहाज डूब गया तो मक्कारों का कुछ नहीं बिगड़ेगा मगर हमारा क्या होगा, फिर कहाँ जायेगा हमारा धर्म, जाति, भाषा, क्षेत्र, पार्टी, खानपान, वेशभूषा, अगड़े—पिछड़े व व्यवसाय संबंधी अहंकार, तब किससे लड़ोगे। त्याग,धैर्य,आपसी सौहार्द व सदभाव जैसी भावना फैलाओ, इंसानियत नामक धर्म के प्रति वफादार बनों न कि इंसानों द्वारा बनाये गये धर्मों के पिट्ठू बनो। ईश्वर एक है,सभी धर्मों का मर्म एक है ये बात समझों व समझाओ। प्रतिमाओं के खण्डन पर जितना हो हल्ला हम आज मचा रहे हैं यदि प्रतिमानों के खण्डन पर इसका सौंवे भाग के बराबर भी हम ध्यान देने लग जाये तो देश वास्तव में स्वर्ग बन जाए। राम,रहीम,गांधी,अम्बेडकर की प्रतिमाओं के टूटने पर इतना शोर ,लेकिन इनके द्वारा बताये गये प्रतिमानों के आये दिन होने वाले खंडन पर इतनी खामोशी,है ना विचित्र बात। हम राम के नाम पर लड़ रहे हैं पर राम के आदर्शों की फिक्र किसी को नहीं है। राम,कृष्ण,अल्लाह,जीजस,वाहे गुरू,महावीर,बुद्ध या किसी भी महापुरूष के नाम में कुछ नहीं रखा है,यदि वास्तव में आप इनमें से किसी में भी आस्था रखते हैं तो पहले इनके द्वारा बताये गये सदाचरण को अपने जीवन में अपनाएं। और हाँ सरकारों व जनप्रतिनिधियों से वास्तविक मुद्दों पर सवाल पूछें। उनके कांग्रेस मुक्त या भाजपा मुक्त भारत जैसे नारों के जाल में ना फंसे उनसे समस्या मुक्त भारत के बारे में सवाल पूछें। समस्यायें दूर होंगी तो हमें भूख से आजादी मिलेगी और भूख से आजादी मिलेगी तो हमारे बीच होने वाली ये छीना—झपटी स्वत: ही बंद हो जायेगी।  संगठित होकर अपने अपने जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली पर अंकुश का काम करें और उन्हें भ्रष्ट, लापरवाह,उदासीन व अयोग्य बनने से रोके । देश के लोकतंत्र को वरदान बनायें उसे श्राप ना बनने दें।