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रिश्वत न देने के कारण डेढ़ साल से बंद पड़ा है कृषि कनेक्शन

Written by स्वत्वाधिकारी,बैस्ट रिपोर्टर न्यूज,जयपुर on . Posted in 6-भरतपुर


बैस्ट रिपोर्टर न्यूज,जयपुर(विशेष रिपोर्ट)॥ किसानों को बिना किसी परेशानी के त्वरित कृषि कनेक्शन उपलब्ध करवाने की राज्य सरकार व जयपुर विद्युत वितरण निगम,लिमिटेड़ की कोशिश रिश्वतखोरी के चक्रव्यू में फंसकर गरीब किसानों को किस कदर परेशान कर सकती है इसका जीवन्त प्रमाण है भरतपुर जिले की बयाना तहसील की पंचायत कैर स्थित गाँव नगला बृजलाल के कृषि कनेक्शन उपभोक्ता श्योदान एवं जगन्या पुत्र श्री सुआलाल के साथ हुआ घटनाक्रम। बात कुछ इस प्रकार है कि नगला बृजलाल निवासी श्योदान एवं जगन्या कृषि कनेक्शन 3 क्यू 9 ए के उपभोक्ता हैं जिनका खाता नम्बर 24080013 है। पूर्व में इनका कनेक्शन 63 के.वी. के सामूहिक ट्रांसफार्मर से जुड़ा हुआ था जोकि दिनांक 2 जून 2011 को जल गया था। जब इस ट्रांसफार्मर से जुडे उपभोक्ताओं ने नया ट्रांसफार्मर लगवाने की मांग की तो विद्युत विभाग के कार्मिकों ने एफ.आर.पी. योजना का हवाला देते हुए प्रत्येक उपभोक्ता के लिए अलग-अलग ट्रांसफार्मर लगवाने का आश्वासन दिया । उल्लेखनीय है कि एफ.आर.पी. योजना के तहत इस क्षेत्र में ट्रांसफार्मर लगाने हेतु ठेकेदार के रूप में मुकेश राणा को अधिकृत किया गया था। ठेका मिलने पर ठेकेदार ने तत्कालीन जे.ई.एन. की शय पर पहले तो लाईन ही नहीं खींची और फिर ट्रांसफार्मरों की कमी का बहाना बनाते हुए एक लम्बे समय तक उपभोक्ताओं को ट्रांसफार्मर उपलब्ध नहीं कराये। फसल ख़राब होने के अंदेशे के चलते जब उपभोक्ताओं ने जल्द से जल्द ट्रांसफार्मर उपलब्ध कराने की मांग की तो उनकी मांग को अनसुना कर दिया गया। परेशान उपभोक्ताओं ने जब यह मांग बैस्ट रिपोर्टर कार्यालय तक पहुँचाई तो बैस्ट रिपोर्टर के दख़ल के चलते विद्युत विभाग के अधिकारियों ने कुछ सकि्रयता दिखाई परन्तु जे.ई.एन की शय के चलते ठेकेदार ने सभी उपभोक्ताओं से पाँच-पाँच हजार रूपये रिश्वत की मांग की। मजबूरीवश अधिकांश किसानों ने अपनी सामर्थय न होने के बावजूद ठेकेदार को रिश्वत दी । रिश्वत देते ही सभी उपभोक्ताओं के ट्रांसफारर्मर लगा दिए गये परन्तु उन्हीं में से एक उपभोक्ता जिसने रिश्वत देने से इनकार किया था तथा ठेकेदार व जे.ई.एन. के भ्रष्टाचार की शिकायत बैस्ट रिपोर्टर तक पहुँचाई थी; के यहाँ ट्रांसफार्मर लगाया ही नहीं। उपभोक्ता ने पुनः बैस्ट रिपोर्टर को जानकारी दी,बैस्ट रिपोर्टर ने पुनः दख़ल दिया,जे.ई.एन को लताड़ा और अविलम्ब उपभोक्ता के ट्रांसफार्मर लगाने को कहा । दबाब के चलते ट्रांसफार्मर तो रखवाया परन्तु दुर्भावनावश लाईन खींचते समय एक पोल कम लगाया तथा ट्रांसफार्मर उपभोक्ता के कुएँ की बजाय कुए से करीब 35 मीटर की दूरी पर ही रख़वा कर अपने काम की इतिश्री कर ली। कृषि कनेक्शन के साथ नि:शुल्क दी जाने वाली ए.बी.सी.केबल भी उपभोक्ता को नहीं दी। इतना ही नहीं ट्रांसफार्मर नये की बजाय इतना पुराना रखवाया गया कि लाईनमैन द्वारा उपभोक्ता का कनेक्शन चालू करके दिखाने के दौरान ही उसमें आग लग गयी और उसने काम करना बंद कर दिया। लाईन मैन ने इसकी रिपोर्ट दिनांक 4.8.2011 को तत्कालीन जे.ई.एन. , बागरैन को भी भेजी थी जिसकी फोटोकॉपी उपभोक्ता व बैस्ट रिपोर्टर के पास उपलब्ध है। कहने का अर्थ यह है कि सामूहिक ट्रांसफार्मर खराब होने की तिथि दिनांक 2 जून 2011 से आज तक कृषि कनेशन उपभोक्ता श्योदान व जगन्या सिर्फ रिश्वत न देने तथा इसकी शिकायत मीडिया तक पहुँचाने के जुर्म में अपना सही ट्रांसफार्मर लगवाने तथा विद्युत सप्लाई चालू होने की बाट जोह रहे हैं और हर उस दरवाजे पर दस्तक देने की कोशिश कर रहे हैं जहाँ कि उनकी समस्या का समाधान सम्भव हो। दर्जनों बार जे.ई.एन. व ए.ई.एन. कार्यालय पर अपनी समस्या रखी परन्तु प्रार्थना पत्र लेकर रख लेते हैं, प्राप्ति की कोई रसीद देते नहीं हैं और कुछ कार्यवाही होती नहीं है। बैस्ट रिपोर्टर के कहने पर उपभोक्ता श्योदान व जगन्या ने तहसीलदार बयाना को प्रार्थना की। तहसील कार्यालय से ए.ई.एन. बयाना को पत्र भी भेजा गया,तहसीलदार महोदय ने दूरभाष पर ए.ई.एन. बयाना को मामले में त्वरित कार्यवाही का निर्देश भी दिया परन्तु जे.ई.एन. कार्यालय की तरह यहाँ भी कान पर जूँ तक नहीं रेंगी। बैस्ट रिपोर्टर ने ए.ई.एन. से दूरभाष पर मामले की जानकारी मांगी तो ए.ई.एन. सुधीर पाण्डे ने तहसीलदार द्वारा मामले की जानकारी मिलने की पुष्टि की तथा मामले की जानकारी के लिए दो दिन का समय मांगा। दो दिन के बाद जब पुनः बैस्ट रिपोर्टर ने ए.ई.एन. बयाना से उनके द्वारा की गई कार्यवाही की जानकारी मांगी तो ए.ई.एन. ने ट्रांसफार्मर कुएँ से दूर रखे होने तथा उपभोक्ता को ए.बी.सी. केबल नहीं देने की पुष्टि की परन्तु एक सफेद झूठ का हवाला देते हुए यह कहा कि लाईनमैन ने रिपोर्ट दी है कि उपभोक्ता झूठ बोलता है उसके यहाँ विद्युत सप्लाई चालू है। ए.ई.एन. बयाना के उक्त कथन के बाद कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न उभरते हैं -1-क्या उपभोक्ता पागल है जो विद्युत सप्लाई चालू होने के बावजूद बार-बार विद्युत सप्लाई चालू करवाने की मांग करेगा। 2. जब लाईनमैन की स्वयं की रिपोर्ट यह कहती है कि ट्रांसफार्मर में आग लग गई थी और वह जाँच के दौरान ही खराब हो गया था तो फिर सप्लाई चालू कैसे हुई और यदि विभाग ने सप्लाई चालू करवाई है तो विद्युत लाईन चालू होने की उपभोक्ता की रसीद तो विद्युत विभाग के पास अवश्य होगी। यदि विभाग यह कहता है कि कनेक्शन विभाग ने चालू नहीं किया बल्कि उपभोक्ता ने अपने स्तर पर ही कर लिया है तो पहले तो विभाग के पास इसका क्या प्रमाण है यदि यदि ऐसा मान भी लें तो अवैध कनेक्शन की जानकारी होते हुए भी विभाग पिछले डेढ़ साल से क्यूं सोया पड़ा है जबकि उपभोक्ता श्योदान व जगन्या लगातार विद्युत विभाग व स्थानीय प्रशासन को इस मुद्दे पर झकझोरते रहे हैं। स्पष्ट है कि रिश्वत न देना व इसकी शिकायत मीडिया तक पहुँचाने से उत्पन्न खीज़ व दुर्भावना के चलते उपभोक्ता का ट्रांसफार्मर खराब पड़ा है,ए.बी.सी केबल मिली नहीं है तथा उपभोक्ता की विद्युत सप्लाई विगत डेढ़ साल से ठप्प पड़ी है। मामले के सप्रमाण प्रस्तुतिकरण के क्रम में बैस्ट रिपोर्टर के पास मामले से संबंधित ऑडियो टेप,लाईन मैन की रिपोर्ट,तहसील कार्यालय से जे.ई.एन. व ए.ई.एन. बयाना को दिए गये निर्देश आदि दस्तावेज उपलबध हैं जोकि इस खबर के अंत में जयपुर विद्युत वितरण निगम के उच्चाधिकारियों के अवलोकनार्थ प्रस्तुत हैं। जिम्मेदार अधिकारियों से अनुरोध है कि पीड़ित उपभोक्ता के कुएँ पर अविलम्ब नया ट्रांसफार्मर स्थापित करवाया जाए व उसकी विद्युत सप्लाई चालू की जाये ( उल्लेखनीय है कि वर्तमान में ठेकेदार द्वारा एक पोल कम लगाये जाने के चलते ट्रांसफार्मर की कुएँ से दूरी करीब 35 मीटर है )। इतना ही नहीं इस मामले को डेढ़ साल तक लटकाये रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले कर्मचारियों को भी यथोचित दण्ड दिया जाए ताकि भविष्य में फिर कोई श्योदान और जगन्या रिश्वत नहीं देने की इतनी बड़ी सज़ान भुगते।