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डॉ प्रभा खेतान के वैचारिक संसार पर स्पंदन ने किया भव्य राष्ट्रिय संगोष्ठी का आयोजन

Written by कार्यालय,बैस्ट रिपोर्टर न्यूज,जयपुर। समाचार डेस्क प्रभारी—2-पी.सी.योगी on . Posted in प्रेस कॉन्फ्रेंस/प्रेस नोट समाचार

बैस्ट रिपोर्टर न्यूज, जयपुर (आशा पटेल)। राजस्थान साहित्य अकादमी, उदयपुर और स्पंदन महिला साहित्यिक एवं शैक्षणिक संस्थान जयपुर के संयुक्त तत्वावधान में एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी ‘डॉ. प्रभा खेतान का वैचारिक संसार’ पर संगोष्ठी का आयोजन पिंकसिटी प्रेस क्लब,नारायण सिंह सर्किल,जयपुर के मुख्य सभागार में किया गया। कार्यक्रम का आरम्भ निरूपमा वर्मा की सरस्वती वंदना से हुआ।अतिथियों का स्वागत करते हुए स्पंदन अध्यक्ष नीलिमा टिक्कू ने कहा कि डॉ. प्रभा खेतान ने आठ उपन्यास , 6 कविता संग्रह, और बाज़ार बीच बाज़ार और उपनिवेश में स्त्री’ जैसी महत्वपूर्ण किताबें लिखीं। डॉ. प्रभा खेतान ने प्रसिद्ध नारीवादी फ्रंसिसी लेखिका सिमोन द बोउवा की प्रसिद्ध पुस्तक ‘ द सेकेण्ड सैक्स’ का अंग्रेज़ी से हिन्दी में अनुवाद’ स्त्री उपेक्षिता’‘ नाम से किया और आम महिलाओं को एक नई राह दिखाई।रूढ़िवादी मारवाड़ी परिवार में पली बढी प्रभा खेतान अपने बलबूते पर व्यवसाय के क्षेत्र में आयीं और सफलता प्राप्त की।उन्हें कलकत्ता चैम्बर भवन की एक मात्र महिला अध्यक्ष बनने का गौरव प्राप्त हुआ।

प्रसिद्ध साहित्यकार ममता कालिया ने बताया कि उन्होंने प्रभा खेतान का सारा साहित्य तो पढ़ा ही साथ ही वर्षों पहले कलकत्ता में कई बार उनसे मुलाक़ात की।उन्होंने कहा कि प्रभा खेतान ने अपने जीवन में बहुत संघर्ष किया और विषम परिस्थितियों में अपना साहित्यिक , सामाजिक और व्यवसायिक क्षेत्र में श्रेष्ठ मुक़ाम बनाया। अपनी साहित्यिक कृतियों में उन्होंने स्त्री जीवन की पीड़ा का मार्मिक वर्णन किया है।स्त्रियों के आर्थिक रूप से मज़बूत होने पर उन्होंने बल दिया और स्वयं आर्थिक रूप से मज़बूत बनकर महिलाओं के लिए बहुत कार्य किये। उन्होंने प्रभा खेतान फ़ाउन्डेशन की स्थापना की जो आज देश भर में चर्चित है।ममता जी ने प्रभा जी के साथ अपने रोचक अनुभव साझा करते हुये उनके बहु आयामी व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला।डॉ. दुर्गाप्रसाद अग्रवाल ने उनकी महत्वपूर्ण किताबों का ज़िक्र किया।उनकी आत्मकथा ‘ अन्या से अनन्या’ तक’ का ज़िक्र किया। वे पहली ऐसी लेखिका रहीं जिन्होंने बेहद ईमानदारी और बेबाक़ी से अपने जीवन को चित्रित किया।उन्होंने समाज में प्रचलित टैबू/बैरिकेटस तोड़ने का साहस किया।उनकी कविताएँ उनके मन की पीड़ा का मार्मिक वर्णन करती हैं।डॉ. चंद्र प्रकाश देवल ने प्रभा खेतान के सामाजिक योगदान पर प्रकाश डालते हुए उनके समाज और महिलाओं के लिए किए गये कार्यों पर प्रकाश डाला। राजस्थान साहित्य अकादमी अध्यक्ष डॉ. दुलाराम सहारण ने कहा कि डॉ. प्रभा खेतान ने वर्षों पहले के रूढ़िवादी परिवार- समाज में से निकल कर अपना जो मुक़ाम बनाया वह अद्भुत है। छोटे -छोटे रास्ते तय कर वे बहुत बड़े स्तर पर उद्योग व्यवसाय में प्रतिष्ठित हुईं अपने इस सफ़र का वर्णन भी उन्होंने अपनी किताबों में किया साथ ही उन्होंने बताया कि महिला अपने देश की हो या विदेश में हालात सब जगह पीडादायक ही थे।प्रभा खेतान अपने साहित्य और महत्वपूर्ण सामाजिक कार्यों से सदैव हमारी स्मृतियों में बसी रहेंगी। माधुरी शास्त्री ने सभी अतिथियों का आभार प्रकट किया।कार्यक्रम का सफल संचालन संगीता गुप्ता ने किया।